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पवित्र बाइबल में कहा गया है कि प्रभु ईसा मसीह (शाकाहारी) के आगमन के समय लोग खाने-पीने के लालच में डूबे होंगे। लेकिन हमारे परम दयालु मापा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अपने चुने हुए प्रतिनिधि के माध्यम से मानवता को सदैव धर्ममार्ग दिखाएँगे।
9 अक्टूबर, 2026 को हमारे सुप्रीम मास्टर टेलीविज़न के फ़्लाई-इन न्यूज़ में अमेरिकी भविष्यद्रष्टा और पादरी रेवरेंड ब्रैंडन बिग्स को लिखा एक पत्र दिखाया गया, जो वीगनवाद और शाकाहार पर उनकी नकारात्मक टिप्पणियों के संबंध में था। सितंबर में अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि प्रभु ने उनसे कहा था कि वीगनवाद और शाकाहार उचित नहीं हैं। “और मैंने वीगन लोगों के बारे में टिप्पणी की। तब प्रभु ने मुझसे कहा, ‘यह विकृति है। वीगन होना उचित नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘ब्रैंडन, मैंने तुम्हारे आनंद के लिए सभी वस्तुएँ भरपूर मात्रा में रची हैं।’” “और वे मुझे उन लोगों के बारे में सुधार रहे थे जो टोफू खाते हैं और सोचते हैं, ‘तुम मांस नहीं खा सकते। तुम अंडे नहीं खा सकते। तुम चीज़ नहीं खा सकते। तुम दुग्ध-उत्पाद नहीं खा सकते, क्योंकि तुम नहीं चाहते,’ शायद तुम कहते हो, ‘मैं पशुओं के प्रति संवेदनशील हूँ,’ और ऐसा सब करते हो। प्रभु ने कहा कि यह विकृति है।” “उन्होंने कहा, ‘वीगन या शाकाहारी होना मेरी रचना के अनुरूप नहीं है। मैंने तुम्हें इस प्रकार नहीं रचा।’ और उन्होंने इस विषय में मुझे बहुत कठोरता से सुधारा।” पादरी बिग्स ने विश्व की कुछ घटनाओं के बारे में सटीक भविष्यवाणियाँ की हैं, जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति महामहिम डोनाल्ड जे. ट्रम्प की हत्या के प्रयास और 2025 का म्यांमार भूकंप। उन्होंने एक प्रतिष्ठित और धर्मनिष्ठ ईसाई भविष्यद्रष्टा व उपदेशक के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उनके यूट्यूब चैनल “लास्ट डेज़” के छह लाख से अधिक सदस्य हैं। इसलिए वीगन और शाकाहारी आहार के बारे में उनके ये झूठे बयान विशेष रूप से चिंताजनक थे, क्योंकि वे उनके अनेक अनुयायियों को पीड़ा के नारकीय मार्ग पर भटका सकते हैं। चिंतित नागरिकों के रूप में हमारी सुप्रीम मास्टर टेलीविज़न टीम ने तुरंत श्री बिग्स को पत्र लिखा, जिसमें पवित्र बाइबल के उन अंशों का उल्लेख किया गया जो निर्णायक रूप से बताते हैं कि ईश्वर हमें वीगन बनने की आज्ञा देते हैं, साथ ही, वीगन आहार के लाभों और पशु-जन का मांस खाने के हानिकारक प्रभावों के प्रमाण भी दिए गए। प्रिय रेवरेंड ब्रैंडन बिग्स, हमारी सुप्रीम मास्टर टेलीविज़न टीम लंबे समय से आपके यूट्यूब चैनल की प्रशंसक रही है, क्योंकि आप अपने भविष्यसूचक दर्शन जनता से साझा करते हैं और सभी को इस संकटपूर्ण समय के प्रति सचेत करते हैं। […] अदृश्य जगत से बार-बार संवाद करने वाले व्यक्ति के रूप में, आपको अपने संदेशों का स्रोत पहचानने के लिए विवेक का उपयोग करना चाहिए। यदि आपको मिला संदेश धर्मग्रंथों, करुणा, समस्त तर्क तथा वैज्ञानिक और चिकित्सकीय प्रमाणों के विरुद्ध है, तो आप समझ सकते हैं कि वह शैतान से आया है। पवित्र बाइबल में कहीं भी ईश्वर यह नहीं कहते कि मनुष्यों के खाने के लिए पशुओं को मारा जाए। […] जैसा कि आप भली-भाँति जानते हैं, अंत समय में शैतान निर्बल और निम्न आध्यात्मिक स्तर वाले लोगों को लुभाने तथा धोखा देने के लिए सदा तत्पर रहता है। अब जागने का समय है! या क्या हम मान लें कि आप शैतान के लिए काम करते हैं अथवा आपने ईश्वर के वचनों के बारे में झूठ कहा? या धनी मांस कंपनियाँ आपको बहुत बड़ी धनराशि देती हैं?? क्योंकि उस वीडियो में आपकी कही बातें समस्त तर्क, चिकित्सकीय तथ्यों, वैज्ञानिक प्रमाणों और ईसाई करुणा के विरुद्ध हैं।[...] अतीत के अनेक पैगंबरों और संतों ने वर्तमान समय में फैले नैतिक व आध्यात्मिक भ्रम के प्रति हमें चेताया है और कहा है कि जब तक हम परोपकार के सद्गुण से अपनी रक्षा नहीं करते, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है। लगभग 700 वर्ष पहले, चीन के मिंग राजवंश के भविष्यद्रष्टा और दार्शनिक लियू बोवेन ने यह कथन दिया था: “भले ही आप हीरे या कांसे जैसे दृढ़ अर्हत हों, यदि आप परोपकार का पालन नहीं करते, तो आपकी रक्षा नहीं होगी। सचेत रहें और सावधानी बरतें; किसी के लिए भी इन कठिनाइयों से पार पाना आसान नहीं होगा।” “स्वर्ग की आँखें हैं; पृथ्वी की आँखें हैं। हर व्यक्ति के पास एक जोड़ी आँखें हैं। स्वर्ग में उथल-पुथल है; पृथ्वी पर उथल-पुथल है। फिर भी लोग असीमित तुच्छ मनोरंजन और सुख में डूबे रहते हैं।” इस भविष्यवाणी में लियू बोवेन चेतावनी देते हैं कि भले ही हमने बौद्ध अर्हत यानी संत या किसी सम्मानित ईसाई पादरी जैसा आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर लिया हो, फिर भी यदि हम आध्यात्मिक साधना और परोपकार के सिद्धांत का पालन नहीं करते, तो हमारा पतन हो सकता है। रेवरेंड ब्रैंडन बिग्स का मामला इसका गंभीर उदाहरण है। यह फिर स्मरण कराता है कि इस कठिन समय से पार पाने के लिए हमें सतर्क रहना चाहिए। परोपकार के अभ्यास पर केवल चीनी दर्शन में ही नहीं, बल्कि एस्सीन परंपरा सहित पश्चिमी धर्मग्रंथों में भी बल दिया गया है। एस्सीन एक प्राचीन आध्यात्मिक समुदाय था, जो सभी जीवों के सम्मान में पूर्णतः शाकाहारी आहार अपनाता था। प्रमाण दर्शाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह (शाकाहारी) पवित्र एस्सीन संप्रदाय के सदस्य थे। “एस्सीन शांति-सुसमाचार” में प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाएँ और कथाएँ हैं। सुसमाचार की प्रथम पुस्तक में यीशु विस्तार से बताते हैं कि हमें कौन-से खाद्य पदार्थ खाने चाहिए और कौन-से नहीं। “इसलिए सावधान रहो और अपने शरीर के मंदिर को किसी भी प्रकार की घृणित वस्तु से अपवित्र मत करो। दो या तीन प्रकार के भोजन से संतुष्ट रहो, जो तुम्हें हमारी पृथ्वी-माता की मेज़ पर सदा मिलेंगे। और अपने आसपास दिखाई देने वाली हर वस्तु को निगलने की इच्छा मत करो।[...] क्योंकि तुम्हारा ईश्वर शांति का ईश्वर है और कभी विभाजन में सहायता नहीं करता। इसलिए अपने विरुद्ध ईश्वर का क्रोध मत जगाओ, कहीं ऐसा न हो कि वे तुम्हें अपनी मेज़ से निकाल दें और तुम्हें शैतान की मेज़ पर जाना पड़े, जहाँ पाप, रोग और मृत्यु की अग्नि तुम्हारे शरीर को दूषित कर देगी।” “‘इसलिए सदा ईश्वर की मेज़ से खाओ—वृक्षों के फल और खेतों के अन्न व वनस्पतियाँ। […] क्योंकि इनके अतिरिक्त सब कुछ शैतान का है और पाप व रोग के मार्ग से मृत्यु की ओर ले जाता है। परंतु ईश्वर की समृद्ध मेज़ से लिया भोजन तुम्हारे शरीर को शक्ति और यौवन देता है, और तुम कभी रोग नहीं देखोगे। क्योंकि प्राचीन काल में ईश्वर की मेज़ ने मतूशेलह का पोषण किया था, मैं तुमसे सच कहता हूँ, यदि तुम भी उन्हीं की तरह जियोगे, तो जीवितों का ईश्वर तुम्हें भी पृथ्वी पर उन्हीं जैसा दीर्घ जीवन देगा।’” “द एस्सीन ह्यूमेन गॉस्पेल ऑफ़ क्राइस्ट” में प्रभु यीशु मसीह ने शैतान के प्रलोभन के प्रति चेतावनी दी। “मछुआरे के समान शैतान तुम्हारी आँखों के सामने अनेक खाद्य पदार्थ रखता है और चाहता है कि तुम उन्हें पाने को लालायित हो जाओ, भले ही केवल थोड़ा-सा चखने के लिए, ताकि वह तुम्हें पकड़कर प्रकाश से अंधकार में ले जाए। इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, शैतान के भोजन को मत छूना, क्योंकि वह दुष्ट अज्ञानी और अशिक्षित लोगों के लिए अनेक काँटों, फंदों और हर प्रकार के जाल के साथ घात लगाए बैठा है, यदि तुम एक भी निषिद्ध खाद्य के प्रलोभन में पड़े, तो अन्य सभी की इच्छा भी जागेगी और अंततः ऐसी निषिद्ध वस्तुएँ मृत्यु का भोजन बन जाएँगी; और शैतान विजयी हो जाएगा।” पिंजरे में पक्षी-जनों को रखने वाले व्यक्ति से कहे गए इन शब्दों में जीवों के प्रति प्रभु यीशु मसीह की करुणा स्पष्ट दिखाई देती है। “यीशु ने उससे कहा, ‘तुम क्या सोचते हो, यदि तुमसे अधिक शक्तिशाली या चतुर कोई व्यक्ति तुम्हें, तुम्हारी पत्नी अथवा तुम्हारे बच्चों को बाँधकर पिंजरे में डाल दे; और लाभ कमाने के लिए उन्हें बंदी बनाकर बेचने हेतु पिंजरे में फेंक दे तथा इसी से अपनी जीविका चलाए? मैं तुमसे पूछता हूँ, क्या ये तुम्हारे सहजीव नहीं हैं, जो केवल तुमसे दुर्बल हैं? और क्या वही ईश्वर, हमारे माता-पिता, तुम्हारी तरह उनकी भी देखभाल नहीं करते? मैं तुमसे कहता हूँ, अपने इन छोटे भाइयों और बहनों को मुक्त कर दो और फिर कभी ऐसा क्रूर कर्म मत करना, ऐसी ईमानदार आजीविका अपनाओ जिससे ईश्वर के किसी भी निर्दोष जीव को हानि न पहुँचे।’” पवित्र बाइबल कहती है कि प्रभु यीशु के आगमन के समय लोग खाने-पीने की लालसा में डूबे होंगे। “क्योंकि जलप्रलय से पहले के दिनों में लोग खा-पी रहे थे... उस दिन तक, जब नूह ने जहाज़ में प्रवेश किया; और जब तक जलप्रलय आकर सबको बहा नहीं ले गया, उन्हें होने वाली घटना का कोई ज्ञान नहीं था। मनुष्य के पुत्र का आगमन भी ऐसा ही होगा।” “द एस्सीन ह्यूमेन गॉस्पेल ऑफ़ क्राइस्ट” में निम्नलिखित पद है, जो लगभग समान है, पर अधिक स्पष्ट रूप से कहा गया है: “क्योंकि जलप्रलय से पहले के दिनों में वे मांस और रक्त खा रहे थे और खट्टी मदिरा पी रहे थे... उस दिन तक, जब नूह ने जहाज़ में प्रवेश किया, जलप्रलय के आकर सबको बहा ले जाने तक उन्हें कुछ पता नहीं था, मनुष्य के पुत्र का आगमन भी ऐसा ही होगा।” इसके अतिरिक्त प्रमाण के रूप में, संत पीटर (शाकाहारी) के शिष्य परम पावन पोप संत क्लेमेंट प्रथम (शाकाहारी) ने लिखा: “परंतु [ईश्वर] बलियों से प्रसन्न नहीं होते, यह इससे स्पष्ट है कि जो लोग मांस के लिए लालायित थे, वे उसे चखते ही मार दिए गए… वही ईश्वर, जो आरंभ में पशुओं के वध से अप्रसन्न थे और नहीं चाहते थे कि उन्हें मारा जाए, उन्होंने बलियों की इच्छा से उनका विधान नहीं किया; और न ही उन्होंने आरंभ से उनकी माँग की।” —संत पीटर (शाकाहारी), क्लेमेंटाइन प्रवचन 3.45 आदि… हमारे मापा, दयालु ईश्वर, प्रभु यीशु मसीह के रूप में अवतरित हुए थे। वही दयालु ईश्वर हमारी परम प्रिय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के रूप में अवतरित हैं। Master: हमें हर कीमत पर पशु-जनों और निस्संदेह अपने लोगों की हत्या रोकनी होगी। (जी हाँ, गुरुवर।) क्योंकि हत्या बार-बार हत्या को जन्म देगी। और जब हम एक-दूसरे, पशु-जनों या किसी भी छोटे जीव के साथ निर्दयता से व्यवहार करते हैं, तो स्वर्ग प्रसन्न नहीं होता। यदि हम दया चाहते हैं, तो हमें दयालु बनना होगा। जब हर जगह हमारी भोजन की मेज़ पर अधिक शांति होगी, तभी पृथ्वी पर शांति होगी। इसीलिए वीगन आहार इस ग्रह पर शांति की शुरुआत है। मुझे आशा और विश्वास है कि देर-सवेर इस ग्रह पर सभी समझेंगे कि भोजन के लिए दुर्बल और विनम्र जीवों को मारकर वे गलत कर रहे हैं। पशु-जन असहाय और अहानिकर हैं। इसलिए आध्यात्मिक साधना, पुण्य, स्वर्ग के पुरस्कार या किसी अन्य बात से पहले, यह मूलतः अनैतिक कृत्य है। अपने से दुर्बल, असहाय और निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुँचाना अनैतिक है, जबकि उसने आपको किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाई। हर सभ्यता का आधार यही होना चाहिए। तब हमारा संसार स्वर्ग बन जाएगा। यह समझना सरल है कि यदि हम मांस के लिए पशु(-जनों) को पालना बंद कर दें, तो भूमि के साथ-साथ मौसम का संतुलन भी शीघ्र बहाल हो जाएगा। हमें समझना होगा कि ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ हमारे वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा का परिणाम हैं। और हमारे वातावरण की यह नकारात्मक ऊर्जा हमारी भावनाओं, विचारों तथा घृणा, हिंसा और इतने मनुष्यों व निर्दोष पशु-(जनों) की हत्या जैसे कर्मों से उत्पन्न होती है। यदि हमने आपदाएँ उत्पन्न और आमंत्रित करने वाला अपना आचरण नहीं बदला, तो आपदाएँ कभी समाप्त नहीं होंगी। विश्व में कहीं भी प्राकृतिक आपदा आने पर मेरी आँखों में भी आँसू आ जाते हैं। लोगों की पीड़ा से मेरा हृदय दुखता है। मैं उनकी अनुभूति महसूस करती हूँ और अत्यंत दुखी हो जाती हूँ। परंतु हम मूल समस्या को दूर करके ही आपदाओं को सदा के लिए रोक सकते हैं, अर्थात मनुष्यों की हत्या और निर्दोष पशु-(जनों) के सामूहिक वध को रोककर। जब हम इस पृथ्वी पर शांति और प्रेम से चलेंगे, तभी पृथ्वी और प्रकृति भी हमारे प्रति शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया देंगी। “जैसा हम बोएँगे, वैसा ही काटेंगे।” केवल करुणामय और वीगन बनकर—अर्थात किसी अन्य जीव को हानि न पहुँचाकर—हम हानि से सुरक्षित रह सकते हैं। यदि हम दूसरों की रक्षा करेंगे, तो हमारी भी रक्षा होगी। हम आपको आमंत्रित करते हैं कि अगला भोजन करने से पहले एक क्षण रुककर सोचें कि आप किस मेज़ पर बैठे हैं। क्या वह शैतान की पीड़ादायक मेज़ है, जो निर्दोष पशु-जनों के रक्त और संताप से भरी है—या ईश्वर की आनंदमय मेज़?










